प्रेम समुद्र रुप रस गहिरे

Swami Haridas

Pada 10

प्रेमसमुद्र रुपरस गहिरे, कैसे लागै घाट। बेकार्‌यो दै जानि कहावत जानि पनोकी कहा परी बाट॥ काहूको सर परै न सूधो, मारत गाल गली गली हाट। कहि हरिदास बिरारिहि जानौ, तकौ न औघट घाट॥
गहौ मन सब रसको रस सारहरि को ऐसोइ सब खेल