हरि को ऐसोइ सब खेल

Swami Haridas

Pada 11

हरिको ऐसोइ सब खेल। मृग-तृस्ना जग ब्याप रही हैं, कहूँ बिजोरो न बेल॥ धनमद जोबनमद और राजमद, ज्यों पंछिनमें डेल। कह हरिदास यहै जिय जानौ, तीरथ को सो मेल॥
प्रेम समुद्र रुप रस गहिरेहरि के नाम को आलस क्यों करत है रे