हरि के नाम को आलस क्यों करत है रे

Swami Haridas

Pada 12

हरिके नामको आलस क्यों करत है रे काल फिरत सर साँधैं। हीरा बहुत जवाहर संचे, कहा भयो हस्ती दर बाँधैं॥ बेर कुबेर कछू नहिं जानत, चढ़ो फिरत है काँधैं। कहि हरिदास कछू न चलत जब, आवत अंत की आँधैं॥
हरि को ऐसोइ सब खेलकाहू को बस नाहिं तुम्हारी कृपा तें