सब सुख सदन बदन तुव राधे

Bhagwat Rasik Vani — श्री भगवत रसिक

Verse 10 of 135

(राग टोडी) सब सुख सदन बदन तुव राधे। उपमा कमल ससी नहिं पावत, मीत मान अपराधे॥ मृदु मुसक्यानि हरत मन नैनन, बंक बिलोकन ही दृग आधे। लेत बलाय दुहुँ कर भगवत रसिक सिरोमनि गुननि अगाधे॥ - श्री भगवत रसिक जी, भगवत रसिक की वाणी, अनन्यरसीकाभरण ग्रन्थ (4.4) (राग तोड़ी) सब सुख सदन बदन तुव राधे। उपमा कमल ससि नहिं पावत, मित मन गृहे.. मृदु मुस्कयानि हरत मन नानन, बीएनके बिलोकन ही ड्रेगा आथे। भागवत रसिक के स्वर्गीय आशीर्वाद को दुहकर, सिरोमणी गुणनि अगाधे.. - श्री भागवत रसिक जी, भागवत रसिक की वाणी, अनन्यरसिकभरण ग्रंथ (4.4)
नहिं निर्गुन सर्गुन नहींचस्मा नित्य बिहार कौ, दियौ बिहारिनि मोहि