चस्मा नित्य बिहार कौ, दियौ बिहारिनि मोहि

Bhagwat Rasik Vani — श्री भगवत रसिक

Verse 11 of 135

भगवत रसिक संग जो चाहै, प्रथमहै लोभै त्यागै । देह, गेह, सुत, सम्पति, द्वारा तब हरी सौं अनुरागै॥ - श्री भगवत रसिक, भगवत रसिक की वाणी, अनन्य निश्चयात्मक ग्रंथ [पूर्वार्ध] (05) ईश्वर-प्रेमी व्यक्ति की संगति में जिन सभी चीजों की आवश्यकता होती है, उनमें सबसे पहली चीज है लोभ का त्याग। शरीर, गेह, सुत, संपत्ति, द्वार तब हरि सौन अनुरागाई.. - श्री भागवत रसिक, भागवत रसिक की वाणी, अन्य निश्चयात्मक पुस्तकें [पूर्वार्द्ध] (05)
सब सुख सदन बदन तुव राधेचस्मा नित्य बिहार कौ, दियौ बिहारिनि मोहि