जासौं सपरस चाहिए

Bhagwat Rasik Vani — श्री भगवत रसिक

Verse 106 of 135

जासौं सपरस चाहिए, तासों अपरस नित। जासौं अपरस चाहिए, तासों चिभुकौ चित्त॥ - भगवत रसिक, अनन्य निश्चयात्मक ग्रंथ [उत्तरार्ध] (21) जैसी आपकी जरूरतें हैं, वैसे ही आपके माता-पिता भी हैं। जसौं अपरस चाहिए, तसो चिभुकौ चित्त.. - भागवत रसिका, अन्य निश्चित ग्रंथ [बाद में] (21)
चस्मा नित्य बिहार कौ, दियौ बिहारिनि मोहिआज तो छबीली राधे रसभरी डोलहीं