कोउ सुकिया कोउ परकिया
Bhagwat Rasik Vani — श्री भगवत रसिक
Verse 113 of 135
कोउ सुकिया, कोउ परकिया, कलपि किये मत बादि।
जोरी भगवतरसिक की, नित्य अनंत अनादि॥
- श्री भगवत रसिक, भगवत रसिक की वाणी, निर्विरोध मनरंजन (5)
कोऊ सुकिया, कोउ परकिया, कालापी किए मत पलटो। जोरी भागवत रसिक, नित्य अनंत आदि.. - श्री भागवत रसिक, भागवत रसिक की आवाज, निर्विरोध मनोरंजन (5)