कुंज बिहारिनि लाडिली, कुंजबिहारी लाल।
Bhagwat Rasik Vani — श्री भगवत रसिक
Verse 114 of 135
कुंज बिहारिनि लाडिली, कुंजबिहारी लाल।
भगवत रसिक ह्रदय बसत, गौर स्याँम की माल॥
- श्री भगवत रसिक जी, श्री भागवत रसिक जी की वाणी, अनन्यरसिकाभरण ग्रंथ 1 (18)
कुंज बिहारिणी लाडिली, कुंजबिहारी लाल। भगवत रसिक के हृदय में निवास, सावधान संयम की मल.. - श्री भगवत रसिक जी, श्री भगवत रसिक जी की वाणी, अनन्यरसिकभरण ग्रंथ 1 (18)