चस्मा नित्य बिहार कौ, दियौ बिहारिनि मोहि
Bhagwat Rasik Vani — श्री भगवत रसिक
Verse 123 of 135
राधेजू मेरौ जनम सुधारौ।
अब मोंहि वृन्दावन में डारौ॥
- श्री गोविन्दशरण देवाचार्य
राधेजू मेरा जन्म सुधारो। अब वृन्दावन में साधुओं को डर लगता है.. - श्री गोविंदशरण देवाचार्य