दोऊ कानन लगि कहैं चुंबन देहिं अँकोर

Bhagwat Rasik Vani — श्री भगवत रसिक

Verse 29 of 135

काया कुंज, निकुंज मन, नैन द्वार अभिराम। भगवत हृदय सरोज सुख, बिलसत स्यामाँ स्याम॥ - श्री भगवत रसिक, श्री भगवत रसिक जी की वाणी, अनन्यरसिकभरण ग्रंथ 1 (11) शरीर एक बगीचा है, मन एक बगीचा है, आंखें खुशी का प्रवेश द्वार हैं। भगवत हृदय सरोज सुख, बिलासत् स्यामन स्याम.. - श्री भागवत रसिक, श्री भागवत रसिक जी के वचन, अनन्यरसिकभरण ग्रंथ 1 (11)
चस्मा नित्य बिहार कौ, दियौ बिहारिनि मोहिकोउ सुकिया कोउ परकिया