कोउ सुकिया कोउ परकिया
Bhagwat Rasik Vani — श्री भगवत रसिक
Verse 30 of 135
श्री भगवत उर धारी, भक्ति करि मन को दाबै।
गुरु आज्ञा अनुकूल रहै, नहीं वेदन खावै॥
- श्री भगवत रसिक, भगवत रसिक की वाणी, निर्विरोध मनरंजन (11)
श्री भगवत उर धारी, भक्ति करो मन को दबाओ। गुरु आज्ञा अनुकूल, वेद न खाय.. - श्री भागवत रसिक, भागवत रसिक वाणी, निर्विरोध मनोरंजन (11)