दोऊ कानन लगि कहैं चुंबन देहिं अँकोर

Bhagwat Rasik Vani — श्री भगवत रसिक

Verse 32 of 135

रूप-सरोवर लाडिली, फूले सहज सरोज। पानि, पाद, नाभी, नयन, आनन उदित उरोज॥ - श्री भगवत रसिक, श्री भगवत रसिक जी की वाणी, अनन्यरसिकभरण ग्रंथ 1 (12) सौंदर्य की झील, प्रिय नारी, सहजता से खिलो, सरोज। जल, चरण, नाभि, आंखें, उभरे हुए स्तन... - श्री भागवत रसिक, श्री भागवत रसिक जी की वाणी, अनन्यरसिकभरण ग्रंथ 1 (12)
कोउ सुकिया कोउ परकियादोऊ कानन लगि कहैं चुंबन देहिं अँकोर