दोऊ कानन लगि कहैं चुंबन देहिं अँकोर

Bhagwat Rasik Vani — श्री भगवत रसिक

Verse 33 of 135

दुःख दिखावत लाडिली, कर मूंदित निज गात। अति अधीर हा हा करै, लाल खिलौना हात॥ - श्री भगवत रसिक, श्री भगवत रसिक जी की वाणी, अनन्यरसिकभरण ग्रंथ 1 (13) दुःख दिखावे के लिए है, परन्तु मेरा हृदय छिपा हुआ है। मैं बहुत अधीर हूं, लाल खिलौने को चोट पहुंचाता हूं.. - श्री भागवत रसिक, श्री भागवत रसिक जी की वाणी, अनन्यरसिकभरण ग्रंथ 1 (13)
दोऊ कानन लगि कहैं चुंबन देहिं अँकोरदोऊ कानन लगि कहैं चुंबन देहिं अँकोर