दोऊ कानन लगि कहैं चुंबन देहिं अँकोर
Bhagwat Rasik Vani — श्री भगवत रसिक
Verse 34 of 135
सुरत सरोवर, समर जल, उठत कटाच्छ तरंग।
फूले अस्टादस कमल, अद्भुत अद्भुत रंग॥
- श्री भागवत रसिक जी की वाणी, अनन्यरसिकभरण ग्रंथ 1 (15)
सूरत झील, गर्मी का पानी, कच्छ की उठती लहरें। फूले अस्तदास कमल अद्भुत रंग.. - श्री भागवत रसिक जी की वाणी, अनन्यरसिकभरण ग्रंथ 1 (15)