ग्राम-सिंह भूंस्यौ बिपिन

Bhagwat Rasik Vani — श्री भगवत रसिक

Verse 53 of 135

जो कछु करौ सो समुझि कै, बिनु समझै करि नाहिं। बिनु समझै जिन जिन करी, परे अंध तन माहिं॥ - श्री भगवत रसिक जी, भगवत रसिक की वाणी, अनन्य निश्चयात्मक ग्रंथ [पूर्वार्ध] (25) जो कहा जाए उसे स्पष्ट करें, बिना समझे कोई कार्य न करें। बिना समझे जो भी करो, अंधे शरीर से परे... - श्री भागवत रसिक जी, भागवत रसिक की वाणी, अन्य निश्चयात्मक ग्रंथ [प्रथम भाग] (25)
ग्राम-सिंह भूंस्यौ बिपिनकोउ सुकिया कोउ परकिया