कोउ सुकिया कोउ परकिया
Bhagwat Rasik Vani — श्री भगवत रसिक
Verse 54 of 135
भगवत रसिक अनन्य, होय अद्भुत रस चाटै।
स्यामाँ स्याम बिहार, नित्य तिहिं काल न काटै॥
- श्री भगवत रसिक, भगवत रसिक की वाणी, निर्विरोध मनरंजन (26)
भगवान का स्वाद अनोखा और अद्भुत है. स्यामन स्याम बिहार, नित्य तिहिं कल न कैताई.. - श्री भागवत रसिक, भागवत रसिक की आवाज, निर्विरोध मनोरंजन (26)