ग्राम-सिंह भूंस्यौ बिपिन

Bhagwat Rasik Vani — श्री भगवत रसिक

Verse 55 of 135

ग्राम-सिंह भूंस्यौ बिपिन, देखि सिंह कौ रूप। सुन-सुनि भूसैं गलिन में, सबै स्वान बेकूप॥ - श्री भगवत रसिक जी, श्री भगवत रसिक जी की वाणी, अनन्य निश्चयात्मक ग्रंथ [पूर्वार्ध] (26) ग्राम-सिंह भूंस्यु बिपिन, देखो कौन सिंह रूप में। गली में फुसफुसाहट है, सब चुप हैं। - श्री भागवत रसिक जी, श्री भागवत रसिक जी के वचन, अन्य शास्त्रीय ग्रंथ [प्रथम भाग] (26)
कोउ सुकिया कोउ परकियाचस्मा नित्य बिहार कौ, दियौ बिहारिनि मोहि