माया कौं सब जग भजै
Bhagwat Rasik Vani — श्री भगवत रसिक
Verse 67 of 135
हम सिष स्यामा स्याम के, गुरु हम स्यामा स्याम।
ओत प्रोत अर्पण कियो, निज तन मन धन धाम॥
- श्री भगवत रसिक, भगवत रसिक की वाणी, अनन्य निश्चयात्मक ग्रंथ [उतरार्द्ध] (41)
हम स्याम हैं, स्याम हैं, गुरु के शिरोमणि हैं, हम स्याम हैं स्याम हैं। अपना तन, मन और धन अर्पित करें... - श्री भागवत रसिक, भागवत रसिक की वाणी, अन्य निश्चित ग्रंथ [बाद में] (41)