चस्मा नित्य बिहार कौ, दियौ बिहारिनि मोहि

Bhagwat Rasik Vani — श्री भगवत रसिक

Verse 68 of 135

प्रथम महात्म प्रकृति ज्ञान रवि तहाँ प्रकासे। दूजे ब्रह्म प्रकाश कोटि सुरज सम भासे॥ तीजे पंकज नाभि रमा वैकुण्ठ निवासी। चौथे दसरथ सुवन राम गोपुर के वासी॥ पांच ब्रज के गोप नन्द आदिक सब गोपी। छठे सखि समाज करे लीलारम ओपी॥ भगवत सतए आवरण करहि केलि राधाखान॥ - श्री भगवत रसिक जी, भगवत रसिक की वाणी, अनन्यनिश्चयात्म ग्रन्थ - पूर्वार्द्ध (45) प्रकृति का प्रथम महान ज्ञान रवि तहान प्रकाश से। दूसरा ब्रह्मप्रकाश करोड़ों सूर्यों के समान चमकता है। तीसरे पंकज नाभिराम वैकुण्ठवासी हैं। चतुर्थ दशरथ वासी सुवन राम गोपुर.. गोप नन्द आदि पंच सब ब्रज की गोपियाँ। छठी सखी समाज करे लीलाराम ओपी.. भागवत सत्ये अवरण करेहि केलि राधाखान.. - श्री भागवत रसिक जी, भागवत रसिक वाणी, अनन्यानिश्चतम ग्रंथ - पूर्वार्ध (45)
माया कौं सब जग भजैग्राम-सिंह भूंस्यौ बिपिन