चस्मा नित्य बिहार कौ, दियौ बिहारिनि मोहि

Bhagwat Rasik Vani — श्री भगवत रसिक

Verse 79 of 135

छके जुगल छवि वारूनी, डसे प्रेम रस ब्याल। नैन न परसे गारुडू, देखि दुहुँकी कौ ख्याल॥ - श्री भगवत रसिक जी, भगवत रसिक की वाणी, श्री नित्यविहारी जुगल ध्यान (124) छके जुगल छवि वारुणी, दसे प्रेम रस ब्याल। गरुड़, अपनी आँखें मत देखने दो, देखो दुहुंकी की परवाह किसे है.. - श्री भगवत रसिक जी, भगवत रसिक की वाणी, श्री नित्यविहारी जुगल ध्यान (124)
सुरतरु कामधेनु, चिंतामणि बारि दिये देव दानीपाँयन परि बिनती करै