नवधा भक्ति निमित्त लै, जे सेबत अवतार।

Bhagwat Rasik Vani — श्री भगवत रसिक

Verse 81 of 135

नवधा भक्ति निमित्त लै, जे सेबत अवतार। चाह मुक्ति बैकुंठ की, तिनकौ नहिं अधिकार॥ - श्री भगवत रसिक जी, श्री भागवत रसिक जी की वाणी, श्री नित्य बिहारी जुगल ध्यान (129) नवधा भक्ति निमित लै, जे सेबत अवतार। मोक्ष की चाहत संसार की है, तिनके की नहीं, अधिकार की है.. - श्री भागवत रसिक जी, श्री भागवत रसिक जी की वाणी, श्री नित्य बिहारी जुगल ध्यान (129)
पाँयन परि बिनती करैनहिं निर्गुन सर्गुन नहीं