पाँयन परि बिनती करै
Bhagwat Rasik Vani — श्री भगवत रसिक
Verse 83 of 135
कामी कै प्रिय कामिनी, लोभी कै प्रिय दाम।
ऐसेहि भगवत रसिक कै, प्रिय श्री स्यामाँ-स्याम॥
- श्री भगवत रसिक, भगवत रसिक की वाणी, अनन्यरसीकाभरण ग्रन्थ (8.7.1)
कामी को कामिनी प्रिय है, लोभी को बांध प्रिय है। ऐसे हैं भगवत रसिक, प्रिय श्री श्यामन-स्याम.. - श्री भगवत रसिक, भगवत रसिक की वाणी, अनन्यरसिकभरण ग्रंथ (8.7.1)