पाँयन परि बिनती करै

Bhagwat Rasik Vani — श्री भगवत रसिक

Verse 84 of 135

बहु बिधि मर्दन करें, नहीं चैतन्य होइ सब। भगवत रस की बात, कहा जानै बिनु अनुभव॥ - श्री भगवत रसिक जी, भगवत रसिक की वाणी, अनन्यरसीकाभरण ग्रन्थ (11.6.3) अगर आप सेक्स के कई तरीके अपनाते हैं तो सब कुछ सचेत हो जाता है। भागवत रस की बात, कह जनै बिनु अनुभव.. - श्री भागवत रसिक जी, भागवत रस की वाणी, अनन्यरसिकभरण ग्रंथ (11.6.3)
पाँयन परि बिनती करैकोक कला संगीत लाल कौं