भगवत रसिक मनाय लाडिली

Bhagwat Rasik Vani — श्री भगवत रसिक

Verse 90 of 135

भगवत रसिक मनाय लाडिली, करौं लाल दृग तारे॥ - भगवत रसिक जी, अनन्यरसिकभरण ग्रंथ 5 (6) भागवत रसिक मान्य लाडिली, करुण लाल द्रिग तारे.. - भागवत रसिक जी, अनन्यरसिकभरण ग्रंथ 5 (6)
माया कौं सब जग भजैभगवत रसिक रसिक की बातें