चस्मा नित्य बिहार कौ, दियौ बिहारिनि मोहि
Bhagwat Rasik Vani — श्री भगवत रसिक
Verse 95 of 135
हा हा करौ, परौ पायन अब, ना चलिहैं बरजोरी।
भगवत रसिक उदार स्वामिनी, दैहैं सर्बसु छोरी॥
- श्री भगवत रसिक, भगवत रसिक की वाणी, अनन्यरसिकभरण ग्रंथ 12 (2)
हा हा, ऐसा करो, अब हम ले लेंगे, बाराजोरी नहीं जायेंगे. भागवत रसिक उदार स्वामिनी, दैहें सरबसु छोरी.. - श्री भागवत रसिक, भागवत रसिक की वाणी, अनन्यरसिकभरण ग्रंथ 12 (2)