चस्मा नित्य बिहार कौ, दियौ बिहारिनि मोहि

Bhagwat Rasik Vani — श्री भगवत रसिक

Verse 99 of 135

हमारे वृन्दावन उर ओर । माया काल तहाँ नहिं ब्यापै, जहाँ रसिक सिरमौर॥ टूटि जात सत असत बासना, मन की दौरा दौर । भगवत रसिक बतायौ श्रीगुरु, अमल अलौकिक ठौर॥ - श्री भगवत रसिक, भगवत रसिक की वाणी, अनन्यनिश्चयात्म ग्रन्थ - पूर्वार्द्ध (41) हमारा वृन्दावन हमारा है। माया कल नहीं है, जहां रोमांटिक सिर है... टूटी जाति, सत्य और असत्य का निवास, मन चक्र जारी है. भगवत रसिक, श्री गुरु बताइये, अमल अलौकिक थोर.. - श्री भागवत रसिक, भगवत रसिक की वाणी, अनन्यनिशचतम ग्रंथ - पूर्वार्ध (41)
चस्मा नित्य बिहार कौ, दियौ बिहारिनि मोहिचस्मा नित्य बिहार कौ, दियौ बिहारिनि मोहि