जद्यपि हम सब भाँति ही
Bharatendu Granthavali — श्री भारतेंदु हरिश्चंद्र
Verse 10 of 52
दोऊ हाथ उठाई कै, कहत पुकारि-पुकारि।
जो चाहौ अपुनौ भलौ, तौ भजि लेहु मुरारि॥
- श्री भारतेंदु हरिशचंद्र, भारतेंदु ग्रंथावली, भक्त सर्वस्व (6)
क्यों हाथ उठाओ, पुकारो, पुकारो? जो चाहो सो गाओगे मुरारी.. - श्री भारतेंदु हरिश्चंद्र, भारतेंदु ग्रंथावली, सबके भक्त (6)