जद्यपि हम सब भाँति ही

Bharatendu Granthavali — श्री भारतेंदु हरिश्चंद्र

Verse 9 of 52

(सवैया) दीनदयाल कहाय के धायकें, क्यों दीननसौं नेह बढ़ायौ। त्यौं हरिचंद जू बेदन में, करुणा निधि नाम कहो क्यौं गायौ॥ [1] एती रुखाई न चाहियै तापै, कृपा करिके जेहि को अपनायौ। ऐसौ ही जोपै सूभाव रह्यौं तौ, गरीब निबाज क्यौं नाम धरायौ॥ [2] - श्री भारतेंदु हरिशचंद्र, भारतेंदु ग्रंथावली, प्रेम माधुरी (39) (सवैया) दिनदयाल कहाय के धायकेन, तुम मुझे बधाई क्यों नहीं देते। तुम हरिचंद, तुम तो अशरीरी हो, मैं करुणा निधि का नाम क्यों कहूँ.. [1] मैं नहीं चाहता तुम इतने कठोर, तुम मुझे अपना बनाओ। ऐसो ही जोपै सुभाव रहयौ तौ, गरीब निबज क्यों नाम धरयौ.. [2] - श्री भारतेंदु हरिश्चंद्र, भारतेंदु ग्रंथावली, प्रेम माधुरी (39)
चिरजीवो होरी के रसिया।जद्यपि हम सब भाँति ही