जद्यपि हम सब भाँति ही

Bharatendu Granthavali — श्री भारतेंदु हरिश्चंद्र

Verse 13 of 52

हमारी सरबस राधा प्यारी। सब ब्रज-स्वामिनी हरि-अभिरामिनी श्रीवृषभानु-दुलारी। [1] बृंदाबन-देवी सुख-सेवी सहज दीन-हितकारी। 'हरीचंद' गुन-निधि सोभा-निधि कीरति की सुकुमारी॥ [2] - श्री भारतेंदु हरिशचंद्र, भारतेंदु ग्रंथावली, प्रेम फुलवारी (87) हमारी प्यारी राधा. सर्वा ब्रज-स्वामिनी हरि-अभिरामिणी श्रीवृषभानु-दुलारी। [1] बृंदाबाना-देवी सुखा-सेवी, गरीबों को आसानी से देने वाली। 'हरिचंद' गुण-निधि शोभा-निधि सुकुमारी कीर्ति की.. [2] - श्री भारतेंदु हरिश्चंद्र, भारतेंदु ग्रंथावली, प्रेम फुलवारी (87)
जद्यपि हम सब भाँति हीजद्यपि हम सब भाँति ही