जद्यपि हम सब भाँति ही

Bharatendu Granthavali — श्री भारतेंदु हरिश्चंद्र

Verse 14 of 52

हमारे ब्रज की रानी राधे। जिन निज बस करि मोहन सह सब ब्रज-नर-नारी नाधे॥ [1] परम उदार धाइ सुमिरन के पहिलेहि नासत बाघे। कहि 'हरिचंद' सोच उनकी मोहि जे नहिं इनहि अराधे॥ [2] - श्री भारतेंदु हरिशचंद्र, भारतेंदु ग्रंथावली, प्रेम फुलवारी (74) हमारी ब्रज की रानी राधे। जिन निज बस करि मोहन सहा सब ब्रज-नारी-नारी नाधे।।[1] परम दाता सुमिरन का प्रथम अतृप्त वस्त्र। जहां 'हरिचंद' स्वयं को अपना प्रेमी मानते हैं, वहां उनकी पूजा नहीं होती.. [2] - श्री भारतेंदु हरिश्चंद्र, भारतेंदु ग्रंथावली, प्रेम फुलवारी (74)
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