जद्यपि हम सब भाँति ही

Bharatendu Granthavali — श्री भारतेंदु हरिश्चंद्र

Verse 15 of 52

हमारी प्रान-जीवन-धन श्यामा। ब्रज-जन-तरुनि-चक्र-चूड़ामनि पूरनि हरि-मन-कामा॥ [1] अति अभिरामा सव सुख-धामा हरि-वामा भनि-दामा। ‘हरीचंद' तजि साधन सवरे रटत एक तुव नामा॥ [2] - श्री भारतेंदु हरिशचंद्र, भारतेंदु ग्रंथावली, प्रेम फुलवारी (89) हमारे प्राण-जीवन-धन श्यामा। ब्रज-जन-तरुणि-चक्र-चूड़ामणि पुराणि हरि-मन-काम.. [1] अति अभिराम सव सुख-धाम हरि-वामा भानि-दम। 'हरिचंद' तजि साधन सांवरे रात एक तुव नामा.. [2] - श्री भारतेंदु हरिश्चंद्र, भारतेंदु ग्रंथावली, प्रेम फुलवारी (89)
जद्यपि हम सब भाँति हीजद्यपि हम सब भाँति ही