जद्यपि हम सब भाँति ही

Bharatendu Granthavali — श्री भारतेंदु हरिश्चंद्र

Verse 16 of 52

हमारी श्री राधा महारानी। तीन लोक को ठाकुर जो है ताहू की ठकुरानी॥ [1] सब ब्रज की सिरताज लाड़िली सखियन की सुखदानी। 'हरीचन्द' स्वामिनि पिय कामिनि परम कृपा की खानी॥ [2] - श्री भारतेंदु हरिशचंद्र, भारतेंदु ग्रंथावली, वर्षा विनोद (35) हमारी श्री राधा महारानी। तीन लोक के ठाकुर, ताहू की ठकुरानी.. [1] ब्रज के सब मुकुटधारी सखियों की प्रसन्नता। 'हरिचंद', स्वामिनी पिया कामिनी की परम कृपा की कथा.. [2] - श्री भारतेंदु हरिश्चंद्र, भारतेंदु ग्रंथावली, वर्षा विनोद (35)
जद्यपि हम सब भाँति हीजय जय जय जय जय श्री राधा