जद्यपि हम सब भाँति ही

Bharatendu Granthavali — श्री भारतेंदु हरिश्चंद्र

Verse 18 of 52

हमारी प्यारी सखियन की सिरताज। ताहु की महरानी जो सब ब्रज - मंडल - महराज॥ [1] सील सनेह सरस सोभा - निधि पूरनि जन - मन - काज। ‘हरीचंद’ की सरवस जीवनी पालनि भक्त - समाज॥ [2] - श्री भारतेंदु हरिशचंद्र, भारतेंदु ग्रंथावली, प्रेम फुलवारी (84) हमारे प्यारे दोस्तों का ताज. ताहु रानी, ​​सकल ब्रज-मंडल-महाराज।।[1] सिल सनेह सरस सोभा - निधि पुराणी जन - मन - काज। 'हरिचंद' पालनी भक्त - समाज की संपूर्ण जीवनी.. [2] - श्री भारतेंदु हरिश्चंद्र, भारतेंदु ग्रंथावली, प्रेम फुलवारी (84) हमारी प्यारी श्री राधिका सभी मित्रों की शिरोमणि हैं। जो संपूर्ण ब्रज क्षेत्र के राजा हैं और श्रीकृष्ण की पटरानी भी हैं। [1]
जय जय जय जय जय श्री राधाजद्यपि हम सब भाँति ही