जय जय जय जय जय श्री राधा

Bharatendu Granthavali — श्री भारतेंदु हरिश्चंद्र

Verse 21 of 52

जय जय जय जय जय श्री राधा। जब तें प्रगट भई बरसाने नासी जन के तन की बाधा॥ [1] सब सखी आनंदित मन में अति चरण कमल अवराधा। ‘हरीचंद’ ब्रजचंद पिया को प्रेम पंथ जिन साधा॥ [2] - श्री भारतेंदु हरिशचंद्र, भारतेन्दु ग्रंथावली, राग संग्रह (38) जय जय जय जय श्री राधा । जब आप प्रकट होते हैं, तो वर्षा की बौछार उसके शरीर में भर जाती है.. [1] आनंदित मन में सभी मित्रों के चरण कमल अवरुद्ध हो जाते हैं। 'हरिचंद' ब्रजचंद पिया को प्रेम पंथ जिन साध.. [2] - श्री भारतेंदु हरिश्चंद्र, भारतेंदु ग्रंथावली, राग संग्रह (38)
जै जै श्रीवृंदावन देवी।जद्यपि हम सब भाँति ही