जद्यपि हम सब भाँति ही
Bharatendu Granthavali — श्री भारतेंदु हरिश्चंद्र
Verse 23 of 52
जय वृषभानु नन्दिनी राधा।
शिव ब्रह्मादि जासु पद-पंकज हरि बस हेतु अराधा॥ [1]
करुनामयी प्रसन्न चन्द्रमुख हँसत हरति भव-बाधा।
‘हरीचंद’ ते क्यौं जग जीवत जिन नहिं इनहिं अराधा॥ [2]
- श्री भारतेंदु हरिशचंद्र, भारतेंदु ग्रंथावली, कार्तिक स्नान (1)
जय वृषभानु नंदिनी राधा। शिव ब्रह्मादि जसु पद-पंकज हरि बस हेतु आराधना। [1] दयाल प्रसन्न चन्द्रमुख हंसत हरति भव-बाधा। बिनु पूजा बिन 'हरिचंद' जात जग क्यों? [2] - श्री भारतेंदु हरिश्चंद्र, भारतेंदु ग्रंथावली, कार्तिक स्नान (1)