जद्यपि हम सब भाँति ही

Bharatendu Granthavali — श्री भारतेंदु हरिश्चंद्र

Verse 24 of 52

जौं हमरे दोसन लखौ, तौ नहिं कछु अवलंब। अपुनी दीन-दयालता, केवल दखहु अंब॥ - श्री भारतेंदु हरिशचंद्र, भारतेंदु ग्रंथावली, भक्त सर्वस्व (20) अगर हमारे लाखों दोस्त हैं तो किसी को कोई फर्क नहीं पड़ता। आपुनि दय-कृपा, केवल दखहु अनाब.. - श्री भारतेंदु हरिश्चंद्र, भारतेंदु ग्रंथावली, भक्त सर्वस्व (20)
जद्यपि हम सब भाँति हीजय जय जय जय जय श्री राधा