जद्यपि हम सब भाँति ही

Bharatendu Granthavali — श्री भारतेंदु हरिश्चंद्र

Verse 27 of 52

लोक वेद कुल-धर्म बल, सब प्रकार अति हीन। पै पद-बल ब्रजराज के, परम ढिठाई कीन॥ - श्री भारतेंदु हरिशचंद्र, भारतेंदु ग्रंथावली, भक्त सर्वस्व (3) लोक वेद, कुल-धर्म सत्ता, सब अति निकृष्ट। ब्रजराज के पद-बल, परम हठी राजा.. - श्री भारतेंदु हरिश्चंद्र, भारतेंदु ग्रंथावली, सबके भक्त (3)
जद्यपि हम सब भाँति हीजद्यपि हम सब भाँति ही