जद्यपि हम सब भाँति ही

Bharatendu Granthavali — श्री भारतेंदु हरिश्चंद्र

Verse 29 of 52

मरौ ज्ञान वेदान्त को, जरौ कर्म को जाल। दया दृष्टि हम पै करौ, एक नंद के लाल॥ - श्री भारतेंदु हरिशचंद्र, भारतेंदु ग्रंथावली, भक्त सर्वस्व (29) ज्ञान वेदांत के लिए मरो, कर्म के लिए जलो। आइए हम आप पर अपना आशीर्वाद बरसाएं, नंद के पुत्र.. - श्री भारतेंदु हरिश्चंद्र, भारतेंदु ग्रंथावली, सभी चीजों के भक्त (29)
जद्यपि हम सब भाँति हीजद्यपि हम सब भाँति ही