जद्यपि हम सब भाँति ही

Bharatendu Granthavali — श्री भारतेंदु हरिश्चंद्र

Verse 30 of 52

मेरी गति होउ सोई महरानी। जासु भौंह की हिलनि बिलोकत निसु दिन सारँगपानी॥ - श्री भारतेंदु हरिशचंद्र, भारतेंदु ग्रंथावली, कार्तिक स्नान (3) मेरी गति तेरी हो सोई रानी। जसु भों कि हिलनि बिलोकत निसु दिन सारंगपानी.. - श्री भारतेंदु हरिश्चंद्र, भारतेंदु ग्रंथावली, कार्तिक स्नान (3)
जद्यपि हम सब भाँति हीजद्यपि हम सब भाँति ही