जद्यपि हम सब भाँति ही

Bharatendu Granthavali — श्री भारतेंदु हरिश्चंद्र

Verse 31 of 52

मोरौ मुख घर ओर सों, तोरौ भव के जाल। छोरौ सब साधन सुनौ, भजौ एक नंदलाल॥ - श्री भारतेंदु हरिशचंद्र, भारतेंदु ग्रंथावली, भक्त सर्वस्व (9) मोरौ मुख घर या बेटा, तोरौ भव का पानी। सुनो सब बाजे, गाओ एक नंदलाल.. - श्री भारतेंदु हरिश्चंद्र, भारतेंदु ग्रंथावली, सबके भक्त (9)
जद्यपि हम सब भाँति ही(कवित्त)