(कवित्त)

Bharatendu Granthavali — श्री भारतेंदु हरिश्चंद्र

Verse 32 of 52

(कवित्त) नैनन के तारे दुलारे प्रान-प्यारे मेरे दुख के दरन सुख-करन विसाल हैं। [1] मेरो ध्यान मेरो ज्ञान मेरे वेद औ पुरान विविध प्रमान मेरे एक नंदलाल हैं॥ [2] 'हरीचंद' और सों न काम सपनेहूँ मोहिं मेरे सरवस धन जसुदा के वाल हैं। [3] मेरी रति मेरी मति मेरे पति मेरे आन मेरे जग माहिं सबै केवल गुपाल हैं॥ [4] - श्री भारतेंदु हरिशचंद्र, भारतेंदु ग्रंथावली, विनय प्रेम पचासा (24) (कविता) मेरी आँखों के तारे, मेरे प्यारे प्यारे, मेरे दुःख का डर ख़ुशी से बड़ा है। [1] मेरी साधना, मेरा ज्ञान, मेरे वेद-पुराण, मेरे अनेक प्रमाण, मेरे एकमात्र नंदलाल... [2] 'हरिचंद' और उनके पुत्र, न काम न स्वप्न, मोहिं जसुदा कृपा। [3] मेरी पत्नी, मेरी राय, मेरा पति, मेरी मां, सब एक ही गुपाल.. [4] - श्री भारतेंदु हरिश्चंद्र, भारतेंदु ग्रंथावली, विनय प्रेम पचासा (24)
जद्यपि हम सब भाँति हीनित नित होरी ब्रज में रहौ।