जद्यपि हम सब भाँति ही
Bharatendu Granthavali — श्री भारतेंदु हरिश्चंद्र
Verse 39 of 52
राधे भई आपु घनस्याम।
आपुन कौ गोबिंद कहत है, छाड़ि राधिका नाम॥ [1]
वैसेइ झुकि झुकि कै कुंजन मैं, कबहुँक बेनु बजावै।
कबहूँ अपनौ नाम लेइ कै, राधा राधा गावै॥ [2]
कबहूँ मौन गहि रहत ध्यान करि, मूँदि रहत दोउ नैन।
'हरीचंद' मोहन बिनु व्याकुल, नैकु नहीं चित चैन॥ [3]
- श्री भारतेंदु हरिशचंद्र, भारतेंदु ग्रंथावली
राधे भाई आपु घनस्याम। गोबिंद कौन तेरे, कहत 'राधिका नाम'। कब नाम लूं, राधा-राधा गाऊं... [2] कब मैं मौन ध्यान करूं, मेरी आंखें मौन रहें। 'हरिचंद' मोहन बिनु व्याकुल, नायकू को चैन नहीं.. [3] - श्री भारतेंदु हरिश्चंद्र, भारतेंदु ग्रंथावली