जद्यपि हम सब भाँति ही

Bharatendu Granthavali — श्री भारतेंदु हरिश्चंद्र

Verse 4 of 52

भटकयौ बहु बिधि जग बिपिन, मिलयो न कहुँ विश्राम। अब आनंदित ह्वै रहयौ, पाइ चरन घनस्याम॥ - श्री भारतेंदु हरिशचंद्र, भारतेंदु ग्रंथावली, भक्त सर्वस्व (5) दुनिया घूमो बिपिन, मैं इसे आराम नहीं कहना चाहता, मुझसे मिलो। अब मेरे चरणों में प्रसन्न रहो घनस्याम। - श्री भारतेंदु हरिश्चंद्र, भारतेंदु ग्रंथावली, भक्त सर्वस्व (5)
(कवित्त)ब्रज की लता-पता मोहि कीजै