ब्रज की लता-पता मोहि कीजै
Bharatendu Granthavali — श्री भारतेंदु हरिश्चंद्र
Verse 5 of 52
(राग मालकोस)
ब्रज की लता-पता मोहि कीजै।
गोपी पद पंकज की पावन रज जामें मम सिर भीजै॥
आवत जात कुंज की गलियन रूप सुधा नित पीजै।
श्री राधे राधे मुख यह वर हरिचंद को दीजै॥
- श्री भारतेंदु हरिशचंद्र, भारतेंदु ग्रंथावली, प्रेम मालिका (67)
(राग मालकोश) ब्रज की लता के बारे में बताएं? गोपी पद पंकज की पवन रज जमीं मम सर भीजै.. आवत जात कुंज की गलियाँ रूप सुधा नित पिजै। श्री राधे-राधे मुख, हरिचंद को यही वरदान दो.. - श्री भारतेंदु हरिश्चंद्र, भारतेंदु ग्रंथावली, प्रेम मलिका (67)