जद्यपि हम सब भाँति ही

Bharatendu Granthavali — श्री भारतेंदु हरिश्चंद्र

Verse 41 of 52

साधन छाँड़ि अनेक विधि परि रहु द्वारे आय। अपनो जानि निबाहिहैं करि कै कोउ उपाय॥ - श्री भारतेंदु हरिशचंद्र, भारतेंदु ग्रंथावली, भक्त सर्वस्व (22) साधना चण्डी अनेक विधि, राहू से आये देवदूत। अपनों को बचाने का उपाय क्या है? - श्री भारतेंदु हरिश्चंद्र, भारतेंदु ग्रंथावली, सभी चीजों के भक्त (22)
रहौं मैं सदा जुगल-भुज छहियाँ।जद्यपि हम सब भाँति ही