जद्यपि हम सब भाँति ही
Bharatendu Granthavali — श्री भारतेंदु हरिश्चंद्र
Verse 42 of 52
साधुन को सँग पाइ कै, हरि-जस गाइ बजाइ।
नृत्य करत हरि-प्रेम मैं, ऐसे जनम बिहाइ॥
- श्री भारतेंदु हरिशचंद्र, भारतेंदु ग्रंथावली, भक्त सर्वस्व (30)
साधु संग हरि-जस गाना चाहिए। ऐसा जन्म लूं कि हरि के प्रेम में नाचूं... - श्री भारतेंदु हरिश्चंद्र, भारतेंदु ग्रंथावली, सबके भक्त (30)