जद्यपि हम सब भाँति ही

Bharatendu Granthavali — श्री भारतेंदु हरिश्चंद्र

Verse 43 of 52

श्री जमुना-जल पान करू, वसु वृंदावन धाम। मुख में महाप्रसाद रखु, लै श्री वल्लभ नाम॥ - श्री भारतेंदु हरिशचंद्र, भारतेंदु ग्रंथावली, भक्त सर्वस्व (23) श्री जमुना जल पियो, वासु वृन्दावन धाम। मुख में महाप्रसाद राखु, श्री वल्लभ का नाम धरो.. - श्री भारतेंदु हरिश्चंद्र, भारतेंदु ग्रंथावली, सबके भक्त (23)
जद्यपि हम सब भाँति हीजद्यपि हम सब भाँति ही