जद्यपि हम सब भाँति ही

Bharatendu Granthavali — श्री भारतेंदु हरिश्चंद्र

Verse 44 of 52

श्री वल्लभ वल्लभ कहौ, छाँड़िं उपाय अनेक। जानि आपनौ राखि हैं, दीन बंधु की टेक॥ - श्री भारतेंदु हरिशचंद्र, भारतेंदु ग्रंथावली, भक्त सर्वस्व (21) श्री वल्लभ वल्लभ कहिये, अनेक छंदबद्ध समाधान हैं। जानो अपनी राखी, गरीब मित्र का सहारा.. - श्री भारतेंदु हरिश्चंद्र, भारतेंदु ग्रंथावली, सर्वजन भक्त (21)
जद्यपि हम सब भाँति हीश्री राधे मोहिं अपनौ कब करिहौ