जद्यपि हम सब भाँति ही

Bharatendu Granthavali — श्री भारतेंदु हरिश्चंद्र

Verse 49 of 52

तन पुलकित रोमांच करि, नैननि नीर बहाव। प्रेममगन उन्मत ह्वै, राधा राधा गाव॥ - श्री भारतेंदु हरिशचंद्र, भारतेंदु ग्रंथावली, भक्त सर्वस्व (24) आपका शरीर रोमांचित है, आपकी आँखों में पानी आ रहा है। प्रेममन उन्मत ह्वै, राधा राधा गाव.. - श्री भारतेंदु हरिश्चंद्र, भारतेंदु ग्रंथावली, भक्त सर्वस्व (24)
जद्यपि हम सब भाँति हीजद्यपि हम सब भाँति ही