जद्यपि हम सब भाँति ही
Bharatendu Granthavali — श्री भारतेंदु हरिश्चंद्र
Verse 50 of 52
वेद भेद पायो नहीं, भए पुरान पुरान।
स्मृतिहू की सब स्मृति गई, पै न मिले भगवान॥
- श्री भारतेंदु हरिशचंद्र, भारतेंदु ग्रंथावली, भक्त सर्वस्व (8)
वेद खंडित नहीं हैं, पूर्ण एवं पूर्ण हैं। सब स्मृतियाँ गाई जाती हैं, भगवान नहीं मिलते.. - श्री भारतेंदु हरिश्चंद्र, भारतेंदु ग्रंथावली, सब वस्तुओं के भक्त (8)